"बसंत ऋतु सुहानी"         (  गीत)

 

आयी बसंत ऋतु सुहानी
पीली सरसों झूमे मस्तानी
आयी बसंत ॰॰॰॰

प्रकृति का हो रहा श्रंगार 
कोयल कुहू-कुहू रही पुकार
आयी ऋतुओं की रानी
आयी बसंत॰॰॰॰

सुर सँगीत हर मन में  छाया
पिक कलरव मधुर मीत भाया 
खेतों में लहराए धानी 
आयी बसंत॰॰॰॰

खेत हरे-भरे लहराए
फूलों पर भँवरे मंडराए 
ऋतु है ये बड़ी निराली
आयी बसंत ॰॰॰॰

सुन्दर हरियाली है  छायी
पीली चूनर मनोहर उड़ायी 
रही दुल्हन सी सरमायी 
आयी बसंत॰॰॰॰

शीतल मंद हवा मतवाली 
प्रकृति के अधरों पर लाली 
हर मन को चहकायी 
आयी बसंत ऋतु सुहानी।।

✍️...पदमावती ’पदम’
         आगरा।

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