चि. आदित्य प्रकाश पाल संग सौ. आरती पाल का ‘शुभ विवाह’ मातुश्री अहिल्या बाई होल्कर की जयन्ती 31 मई 2023 को हर्ष एवं उल्लास के वातावरण सम्पन्न हुआ
श्री अयोध्या प्रसाद पाल दिनाँकः 6 जून 2023
निवासी महोली, पो. कमलापुर
सीतापुर, उत्तर प्रदेश
मो. 99191 95207, 80907 37250
शुभ विवाह की हार्दिक बधाइयाँ
आदरणीय महोदय,
आपके सुपुत्र चि. आदित्य प्रकाश पाल संग सौ. आरती पाल का ‘शुभ विवाह’ मातुश्री अहिल्या बाई होल्कर की जयन्ती 31 मई 2023 को हर्ष एवं उल्लास के वातावरण सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आपने आवास पर जयन्ती समारोह का सफलतापूर्वक आयोजित करके समाज को पारिवारिक एकता व वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश दिया है। इस शुभ अवसर पर आमंत्रित करने के लिए हम आपके अत्यन्त आभारी हंै। आपने पारिवारिक एकता तथा सामाजिक दायित्वों की पूर्ति हेतु हर पल जीते हुए पारिवारिक एवं सामाजिक एकता तथा वसुधैव कुटुम्बकम’ के आदर्श को जीवन्त स्वरूप प्रदान किया है। इस हेतु समाज सदैव आपका ऋणी रहेगा। साथ ही समाज सदैव आपके महान व्यक्तित्व से प्रेरणा एवं मार्गदर्शन ग्रहण करता रहेगा।
चि. आदित्य प्रकाश की पूज्यनीया दादीजी, पूज्यनीय दादाजी स्व. मक्का प्रसाद पाल, माताजी श्रीमती पाल के साथ ही आपने बड़े लाड़-प्यार से ही नहीं वरन् परमात्मा के महान गुणों से अपने प्राणों से भी प्रिय चि. अमित को उच्च आध्यात्मिक संस्कारों से संवारा है। साथ ही आप सभी ने चि. आदित्य प्रकाश को अपने त्यागमय, कर्तव्यपरायण एवं सेवामय सरल जीवन के महान अनुकरणीय गुणों एवं आदर्शांे से युक्त बनाया है। हमें पूरा विश्वास है कि नव वर-वधु चि. आदित्य प्रकाश एवं सौ. आरती आप लोगों के आशीर्वाद से घर को स्वर्ग बनायेंगे। हम नव वर-वधु के सुखी, सफल एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन हेतु कुछ प्रेरणादायी विचार आशीर्वाद स्वरूप प्रेषित कर रहे हैं:-
1. विवाह दो शरीरों और आत्माओं का मिलन है। शरीर और आत्मा दोनों ईश्वरीय प्रकाश से प्रकाशित रहते हैं। यह मिलन
आध्यात्मिक मिलन है जो आजीवन जुड़ा रहता है। वही विवाह सफल होता है जहाँ सांसारिक और आध्यात्मिक बन्धन दोनों का सामंजस्य है।
2. विवाह दो के बीच नहीं तीन अर्थात वर-वधु तथा परमात्मा के बीच होता है। परमात्मा को साक्षी मानकर वर-वधु विवाह की सारी प्रतिज्ञाऐं करते हैं।
3. विवाह स्त्री-पुरूष का आत्मिक और हार्दिक मिलन है। मस्तिष्क और हृदय की आपसी स्वीकृति है। स्त्री-पुरूष दोनों का कर्तव्य है कि वे दोनांे एक दूसरे के स्वभाव और चरित्र को समझें। दोनों के आपसी सम्बन्ध अटूट हों। ईश्वर को साक्षी मानकर एक दूसरे के प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार तथा एक अच्छा जीवन साथी बनने का उनका एकमात्र लक्ष्य होना चाहिये।
4. वैवाहिक बन्धन नैतिक और आध्यात्मिक विकास में सहायक हैं। वैवाहिक बन्धन में केवल शारीरिक बन्धन को महत्व न देकर आध्यात्मिक गुणों के द्वारा ईश्वर की निकटता के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए। तथापि ईश्वर द्वारा निर्मित इस सृष्टि को आगे बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।
परमपिता परमात्मा की साक्षी में नव वर-वधू की आपसी सहमति:-
1. आज से हम एक-दूसरे के साथ अपने व्यक्तित्व को मिलाकर नये जीवन की सृष्टि करते हैं।
2. पूरे जीवन भर एक-दूसरे के मित्र बनकर रहेंगे और बड़ी से बड़ी कठिनाईयांे एवं विपत्तियों में एक-दूसरे को पूरा-पूरा विश्वास, स्नेह तथा सहयोग देते रहंेगे।
3. जीवन की गतिविधियों के निर्धारण में एक-दूसरे के परामर्श को महत्व देंगे।
4. एक-दूसरे की सुख-शांति तथा प्रगति-सुरक्षा की व्यवस्था करने में अपनी शक्ति, प्रतिभा, योग्यता तथा साधनों आदि को पूरे मनोयोग एवं ईमानदारी से लगाते रहेंगे।
5. दोनों अपनी ओर से श्रेष्ठ व्यवहार बनाए रखने का पूरा-पूरा प्रयत्न करेंगे। मतभेदों और भूलों का सुधार शांति के साथ करेंगे। किसी के सामने एक-दूसरे को लांछित एवं तिरस्कृत नहीं करेंगे।
6. दोनों में से किसी के असमर्थ या विमुख हो जाने पर भी अपने सहयोग और कत्र्तव्यपालन में कमी नहीं आने देगे।
7. कत्र्तव्यपालन एवं लोकहित जैसे कार्यो में एक-दूसरे के सहायक बनेंगे।
8. एक-दूसरे के प्रति पतिव्रत तथा पत्नीव्रत धर्म का पालन करेंगे। इसी मर्यादा के अनुरूप अपने विचार, दृष्टि एवं आचरण विकसित करेंगे।
इन्हीं हार्दिक शुभकामनाओं सहित,
भवदीय
श्रीमती उमाजी पाल
प्रदीपजी पाल,
अध्यक्ष, जय जगत फाउण्डेशन एवं
एडीटर इन चीफ,
पाल वल्र्ड टाइम्स न्यूज एवं वैवाहिक वेबसाइट
इं. भानु प्रताप पाल, लखनऊ
विश्व पाल, प्रिय जय जगत
सर्वेश पाल, प्रापर्टी सलाहकार, लखनऊ
प्रधान कार्यालय - बी-901, आशीर्वाद, उद्यान-2, एल्डिको,
रायबरेली रोड, लखनऊ-226025
वाट्सअप 9839423719












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