पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा युवा आइकॉन सम्मान से सम्मानित किए गए श्री डी.के. आनन्द

लखनऊ : समाजवादी पार्टी अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री माननीय अखिलेश यादव  द्वारा युवा आइकॉन (युवक आदर्श)  सम्मान से श्री डी.के. आनन्द, वाराणसी को सम्मानित किया गया   । जिन्होने कहा की  मैं यह सम्मान "ओशो और विवेकानन्द के साथ डॉ. भीमराव अम्बेडकर " को समर्पित करता हूँ ।भारत युवा कहा जा रहा है लेकिन केवल कहने मात्र से युवा नहीं हो सकता है ,भारतीय तथाकथित युवा की मनोदशा सदियों पुरानी पाखंड, और दकियानूसी है ,वह बूढा ही पैदा होता है और बूढा ही मरता है । भारत का युवा को पैदा करना होगा जिसका चित्त युवा हो वह किसी जाति,धर्म,राष्ट्र से बंधा नहीं वह मानवीय संवेदना से भरपूर स्वतंत्र हो उसके लिए मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारा,चर्च का भेद ना हो वह मात्र उसे स्वयं में उतारने खुद को समझने के लिए ध्यान के लिए स्थान मात्र हो । वह सहज ,सरल,स्वाभाविक हो ।
हमारा संबिधान ऐसा ही युवा है जो हमेशा देश को युवा रखेगा लेकिन उसपर कुछ धूल की परतें डालने की कोशिश की जाती रहीं हैं उसको आज के युवा को समझने की जरूरत है उसके उपयोग की कला सीखनी होगी । 
आनंद बोधि (दीपक कुमार )

कुछ बातें यहां विवेकानंद और ओशो की उद्धरण कर रहा हूँ ताकि कुछ बातें समझ आ सकें ।
विवेकानंद : जाति-पुरोहितवाद से लड़ने वाले क्रांतिकारी जिन्हें भगवा हिंदूवादी बना दिया गया,स्वामी विवेकानंद का राजनीतिक प्रतीक की तरह इस्तेमाल उनके जीवन और विचारों के तटस्थ मूल्यांकन में एक बड़ी बाधा है
अव्यक्त :- हर दौर में दुनिया में ऐसी कई ऐतिहासिक शख़्सियतें हुई हैं, जिन्होंने अपेक्षाकृत कम उम्र में ही समाज में हलचलें पैदा कर दीं. सुदूर अतीत में ईसा मसीह और शंकराचार्य हुए जिनका जीवनकाल बहुत छोटा रहा. हाल के इतिहास में छोटी उम्र के बड़े क्रांतिकारियों में भगत सिंह, मार्टिन लूथर किंग जूनियर और स्वामी विवेकानंद जैसे उदाहरण सामने आते हैं.
स्वाभाविक है कि यदि छोटे से जीवन में बड़े काम हुए हैं, तो उनका जीवन भी नाटकीय घटनाओं से भरा रहा होगा. परिस्थितियों के मारे उनमें तेजी से आनेवाले बदलावों की एक श्रृंखला रही होगी. उनके व्यक्तित्व का कोई ऐसा अनोखा पहलू रहा होगा, जो उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता होगा. यह सब कुछ मिलकर उनके जीवन को किंवदंती बनाता होगा.
सत्याग्रह
समाचार पत्र

अब ऐसी क्रांति की जरूरत है जो बाकी की क्रांतियों को भुला दे। अब एक ऐसी क्रांति की जरूरत है, जो कल्याण करनेवालों से कहे कि आप क्षमा करें। बहुत कल्याण हो चुका। पांच हजार साल से जो हमारा कल्याण करते हैं, अभी तक नहीं कर पाए, अब आप चुप हो जाएं। अब आपकी कोई जरूरत नहीं है।
गरीब के कल्याण का मतलब है, संपत्ति का उत्पादन और गरीब के कल्याण का मतलब है, ऐसे यंत्रों का उत्पादन जो संपत्ति को हजार गुना रूप से पैदा करने लगे। गरीब के कल्याण का मतलब है, पृथ्वी को वर्ग-विद्वेष से विहीन करने का उपाय, वर्ग-विद्वेष नहीं।लेकिन सारे समाजवादी वर्ग-विद्वेष पर जीते हैं। उनका सारा जीना क्लास-कांफ्लिक्ट पर है। गरीब को अमीर के खिलाफ भड़काओ, कारखाना कम चले, कारखाने बंद हों, हड़ताल हो, बाजार बंद हों, मोर्चे हों--इनमें लगे रहें। गरीब को पता नहीं कि जितने मोर्चे होते हैं, जितनी हड़तालें होती हैं, जितना कारखाना बंद होता है--गरीब अपने हाथों से गरीब होने का उपाय कर रहा है; क्योंकि ऐसे देश की संपत्ति कम होगी।

"ओशो -नए भारत का जन्म "

भविष्य में, कुछ चीजें गायब हो जाएंगी।* 
 राष्ट्रों को मिटना होगा क्योंकि पृथ्वी एक छोटा गाँव बन गया है;  अब वे अर्थहीन हैं।  भारत और पाकिस्तान और चीन और अमेरिका और कनाडा और इंग्लैंड और जर्मनी अर्थहीन हैं;  पृथ्वी एक हो गई है  जिस दिन मनुष्य गुरुत्वाकर्षण से परे जाने में सक्षम हो गया, पृथ्वी एक हो गई।  एक अंतरिक्ष यान में पहला आदमी रोने लगा जब उसने पूरी पृथ्वी को एक के रूप में देखा।  किसी ने भी पूरी पृथ्वी को एक के रूप में नहीं देखा था।  उसने पृथ्वी को देखा वह विश्वास नहीं कर सकता था कि अमेरिका और रूस और चीन और इस और उस के कोई विभाजन कैसे हो सकते हैं।  वह खुद के बारे में अमेरिकी या रूसी नहीं सोच सकता था।
 वह केवल पृथ्वीवासी के रूप में ही अपने बारे में सोच सकता था।  और वह पृथ्वी के किसी भी विभाजन को नहीं देख सकता था क्योंकि विभाजन केवल राजनीतिक मानचित्र पर होते हैं;  पृथ्वी अविभाजित है।  जिस दिन मनुष्य गुरुत्वाकर्षण की बाधा को पार कर गया, गुरुत्वाकर्षण से मुक्त हो गया, पृथ्वी एक हो गई।  यह अब केवल समय का सवाल है .... राष्ट्रों को गायब होना होगा, और राष्ट्रों के साथ राजनेताओं की दुनिया और राजनीति की दुनिया गायब हो जाएगी।  एक महान दुःस्वप्न पृथ्वी से गायब हो जाएगा।
और राष्ट्रों के साथ गायब होने वाली दूसरी चीज हिंदू धर्म, मोहम्मडनवाद, ईसाई धर्म, यहूदी धर्म है।  जिस तरह राजनीति ने पृथ्वी के नक्शे को विभाजित किया है, धर्मों ने मनुष्य की चेतना को विभाजित किया है। निश्चित रूप से धर्म का विभाजन राजनीति के विभाजन से अधिक खतरनाक है, क्योंकि राजनीति केवल पृथ्वी को विभाजित कर सकती है ... धर्मों ने मनुष्य की चेतना को विभाजित किया है।  मनुष्य को उसके अस्तित्व तक पहुंचने की अनुमति नहीं है।  एक सिर्फ मोहम्मडन होना है - एक बहुत ही संकीर्ण चीज।
एक को सिर्फ हिंदू होना है - बस एक बहुत ही संकीर्ण चीज है।  क्यों।  जब आपके पास पूरी विरासत हो सकती है?
जब पूरा अतीत तुम्हारा है और पूरा भविष्य तुम्हारा है, तो तुम्हें क्यों बांटना चाहिए?  मुझे खुद को 'हिंदू या मोहम्मडन या ईसाई' क्यों कहना चाहिए?  कुल का दावा करना चाहिए।  कुल का दावा करने से आप कुल हो जाते हैं: आप सभी संकीर्ण विभाजन, भेद खो देते हैं, आप पूरे हो जाते हैं।  तुम पवित्र बनो।  जो होना है, वही होना तय है।  ऐसा होना है।  अन्यथा मनुष्य और नहीं बढ़ सकेगा।
  यह बहुत महत्वपूर्ण है कि मनुष्य को सभी बाधाओं को छोड़ना होगा। राष्ट्र और धर्म और चर्च।  यही मैं यहां कर रहा हूं: मानव चेतना के विभिन्न फूलों द्वारा विभिन्न शताब्दियों में जारी सभी सुगंधों को एक साथ लाने की कोशिश करना।  लाओ त्ज़ू एक फूल है, तो बुद्ध है, तो जीसस हैं, तो मोहम्मद भी हैं, लेकिन अब हमें उनकी सारी सुगंध एक में मिलानी होगी - एक सार्वभौमिक सुगंध।  तब, पहली बार, मनुष्य धार्मिक और अभी तक अविभाजित हो सकेगा।  फिर चर्च भी तुम्हारा है और मस्जिद भी और मंदिर भी।  फिर गीता तुम्हारी है, और कुरान और वेद और बाइबिल - सब कुछ तुम्हारा है।  तुम विराट हो जाते हो।
नहीं, मैं एक नया फूल बनाने की कोशिश नहीं कर रहा हूं - फूल हो गए हैं।  मैं उन सभी फूलों में से एक नया इत्र बनाने की कोशिश कर रहा हूं।  यह अधिक सूक्ष्म है, अधिक अदृश्य है;  केवल जिनकी आंखें हैं वे इसे देख पाएंगे।
????ओशो ????  द पाथलेस पाथ
 वॉल्यूम-1, पाठ-10
आज के युवा को  चिंतन करने की जरूरत है ।
आज देश का कर्ज  2014 में 29 लाख करोड़ कर्ज  2020 में बढ़ कर 40 लाख करोड़ कर्ज हो चुका है यह जानकारी पत्रकार प्रसुन्न बाजपेई के एपिसोड से है । 
क्या देश के धार्मिक ट्रस्टों संस्थानों और पूंजीपतियों की पूंजी को नहीं ली जा सकती है ?
देश की जनता टेक्स भी देती है धार्मिक संस्थानों को दान भी करती है देश बचाने में आज के युवा को क्रांति नहीं करनी चाहिए ? जिससे इन पैसों का देश के लिए उपयोग हो सके ।
जब देश आजाद हुआ था तो यहां के राजाओं व नबावों ने संपत्ति को देश के नाम कर दिया था । 
आज समय आ चुका है आर्थिक आजादी के लिए व्यक्तिगत पूंजी को सीमित (Personal capital limit Act.)  कानून बना कर सच्चे समाजवाद को स्थापित किया जा सकता है ।

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