"अमर लेख" अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक मंच इटावा "लक्ष्य प्राप्ति ही लक्ष्य हमारा "के तत्वाधान में मथुरा में आयोजित
"अमर लेख" अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक मंच इटावा "लक्ष्य प्राप्ति ही लक्ष्य हमारा "के तत्वाधान में आयोजित काव्य कुंभ उदासीन आश्रम मोती झील मथुरा में बड़े ही धूम धाम से संपन्न हुआ जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए हुए कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएंँ पढ़ीं ,,,
कार्यक्रम उदासीन आश्रम के महंत सेवादास जी के शिष्य राजेश मुनि व शिष्य। दीप्ति उदासीन के सौजन्य से आयोजित किया गया।
सर्व प्रथम डॉ संगीता पाल की पुस्तक "छंद सीखने मैं चली" का विमोचन हुआ। संस्था के संस्थापक रवि पाल "खामोश" ने संस्था को और विस्तार करने के निर्देश दिए तथा अपनी प्रसिद्ध रचना (पाट दोनों सपाट चकिया के ,फिर आटा महीन कैसे हो), संस्था और कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ० राम प्रकाश "पथिक" कासगंज ने सामाजिक समरसता पर टिप्पणी देते हुए रचनाएं पढ़ी, संस्था की सचिव डॉ संगीता पाल ने अपनी मुख्य रचना हे शारदे मां सरस्वती वंदना पढ़कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया,
कार्यक्रम के संयोजक कवि अमर पाल उन्नाव ने अवधी भाषा का परिचय देते हुए अपनी अवधी भाषा की रचना पढ़ी ,कवि अमर पाल ’अमर’ रायबरेली ने कार्यक्रम का संचालन किया और अपने काव्यपाठ में रचना "किंतु मेरे कन्हैया नहीं हो" पढ़ी कवि सोनू पाल उन्नाव ने "तीखा तीखा जीवन जीते मीठा मीठा गाकर" कविता पढ़ी ओज कवि दिलीप बघेल ने तिलक को परिभाषित करती हुई कविता पढ़ी ,हास्य कवि पवन पाल ललुवा ललुवा करके सभी को गुदगुदाया, कवि योगेंद्र नंदन ने,कवि अर्जेंट सिंह ने बहुत सुंदर काव्य पाठ किया ओज कवि पुनीत पांचाल ने "झांसी वाली रानी याद आएगी" कविता पढ़ी,
कवि अशोक कुमार आशु ने राष्ट्रीय भावना से ओत प्रोत कविता पढ़ी, कवयित्री सरोज सौदामिनी ने बेटियों की कविता पढ़कर सबको भाव विभोर कर दिया।कवि बलबीर सिंह की शायरी सभी को पसंद आईं कवि रवि शंकर ने सुंदर दोहे और मुक्तकों से मन जीत लिया कवि रूपेश धनगर ने अपनी रचनाओं में मथुरा वृंदावन की विविधताओं पर प्रकाश डाला। अमर लेख संस्था ने आश्रम में उपस्थित बेटियों को सम्मानित किया।।।












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