रजनी तिलक सदैव नारी उत्थान में लगी रही


प्रायागराज 28.05.2023, सत्य असत्य का निर्णय करने की क्षमता रखने वाली, सभी जीवों के साथ समभाव हो, सभी मनुष्य शांति से जिये, शौहार्द से रहे, मानव भाव समान होने के कारण कोई किसी को पीड़ा न दे आदि अनेक हितकारी विचारो का भण्डार रखने वाली प्रख्यात दलित महिला साहित्यकार 'रजनी' यानि रात, 'तिलक' यानि बिन्दी अर्थात जीवन को प्रकाशमय बनाने वाली, डा. भीमराव अम्बेडकर को ही प्रज्ञा सूर्य के रूप में स्वीकार करके अपने तथा अपनो के जीवन में फैले पाखण्ड, अंधविश्वास, मूढ़ता  और अंधकार को सदा के लिये दूर करने वाली त्याग की प्रतिमूर्ति, अदम्य साहस और एक हिम्मत वाली नारी रजनी तिलक (जन्म 27 मई 1958) का 65वां जन्म दिवस समारोह सादगीपूर्ण ढंग से डा. अम्बेडकर वेलफेयर एसोसिएशन (दावा) और प्रबुद्ध फाउंडेशन के संयुक्त तत्त्वावधान में मम्फोर्डगंज स्थित राष्ट्रीय शिशु विद्यालय में दावा अध्यक्ष उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज की अध्यक्षता में मनायी गयी।

         दावा अध्यक्ष ने बताया कि रजनी दीदी अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होते समय अपने रिश्ते नाते को भी बगल में रखकर एक शेरनी की तरह कदम बढ़ाने वाली महान महिला थी जो सारे भारत की महिलाओं को ममता में पिरोने वाली बहुप्रतिभाशाली नारी रही है। वो मन मे हिम्मत भरने के लिये ईमानदार, वफ़ादार, समझदार नारियों का काफिला तैयार करके देश को सौंपा है।

        राष्ट्रीय शिशु मन्दिर के पूर्व प्रधानाचार्य एल.के. अहेरवार  ने रजनी तिलक की एक कविता कहते हुये बताया कि जीरो हूँ...स्त्री हूँ। हर बार प्लस होती हूँ। बनाती हूँ प्यार का दरिया, आशाओं का क्षितिज। समा लेती हूँ सारी कुंठाये, सारी निराशाएं। जीरो हूँ, जीरो से शुरू होकर चलते हुए कदमो का सपना देखती हूँ। जीरो हूँ स्त्री हूँ , पर कर सकती हूँ वह सब जो असम्भव है। मर सकती हूँ , उनके लिये/ जो लक्ष्य के लिये मरते है। उठा सकती हूँ उन्हें जो नेक दिल रखते है।

    रजनी अपनी कविता के माध्यम से नारी का परिचय कराते हुये यही सीख देती है कि - तू नारी है, सही है। परन्तु यह समाज तुझसे निर्मित हुआ है। यह मानव कुल तेरे कारण है, तुझमें असम्भव से सम्भव करने की ताकत है। तू सक्षम है। क्यों डरी, सहमी होकर जीवन जी रही हो। दे अपना परिचय, दुनिया तुझे जीरो समझती है। जीरो के विना समाज एवं पुरुष की कोई कीमत नही है। मैं हूँ तो समाज है। यह तेरी विशेषता का परिचय सारे जहां को करा दे। कब तक दबी-दबी रहेगी। सहनशील बनकर करा दे तेरी शक्ति का परिचय, ताकि समाज अपनी भूल को समझ सके। इस तरह रजनी नारी उत्थान में सदैव लगी रही।


      शिशु मन्दिर के प्रधानाचार्य सी.एल. कुशवाहा ने बताया कि रजनी तिलक की कविता संग्रह "पदचाप" , 'हवा सी बेचैन युवतियां' की कविताओं में उनकी भावना, आशा, आकांक्षा को देखा जा सकता है। उनकी कहानी संग्रह "बेस्ट आफ करवा चौथ" की कहानी गुड्डी लाजो द्वारा उनके अपने जीवन की ही झलक है। रजनी तिलक की आत्म कथा "अपनी जमी अपना आसमा" में उन्होंने अपने बचपन से युवावस्था तक कि घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से लिखा है। 'मुक्तिकामी दलित नायिकायें' उनकी छोटी एवं महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। समकालीन दलित महिला लेखन के तीन अंक विशेषांक के रूप में उनके सम्पादन में छपे है।


     जयन्ती समारोह में कार्यशाला के बच्चों में अंतरा पटेल, अम्बिका, तनु जायसवाल, जिज्ञासा पटेल, संध्या पटेल, तन्वी केशरवानी, ऐंजल केसरवानी, रीत सिंह, सुरभी केसरवानी, पूर्वी केसरवानी, साक्षी, ग्रन्थ केसरवानी, नंदिनी, स्वीटी, संध्या, चाहत, जिज्ञासा, अंशिका, प्रेम प्रजापति, गौरव प्रजापति, अंश केसरवानी, लव, कुश, प्रियांशु, पुष्पेन्द्र, सरस, याशिका, नैना, संजना, आयुषी आदि बच्चे उपस्थित रहे।

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