एक गीत प्रस्तुत है---
कुछ अच्छा करना है हमको,
इसीलिए यह कलम मिली है।
मरकर भी जीना है हमको,
इसीलिए यह कलम मिली है।
खुश रहने के लिए जरूरी,
जोड़- तोड़ की त्यागें भावना।
मुफलिस का दुख-दर्द लिखें हम,
इसीलिए यह कलम मिली है।
श्रम की रोटी खायी हमने,
मेहनत से परिवार चलाया।
स्नेह सभी से करना हमको,
इसीलिए यह कलम मिली है।
हम रविदासा के वंशज हैं,
जी है सदा कबीरी हमने।
सच्चा कलमकार बनना है,
इसीलिए यह कलम मिली है।
कोई दुश्मन नहीं हमारा,
अपना है कुटुम्ब जग सारा।
ऊर्जा जन जन में भरना है,
इसीलिए यह कलम मिली है।
सबसे बड़ी सम्पदा हमको,
मिली अदब की इस दुनिया में।
शब्दों की खेती करना है,
इसीलिए यह कलम मिली है।
सबसे सुखी ‘चन्द्र’ का जीवन,
जो जग को रोशन करता है।
दिशा दिखाये हमारा लेखन,
इसीलिए यह कलम मिली है।
लेखक
चन्द्र, उन्नाव, उत्तर प्रदेश
सम्पर्क: 93071 36064












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