"प्यारे बापू"

 

देश में निकले थे बापू लाठी थामकर ।
जन जन को जगाया वतन के लिए ।

यहाँ से भागो गोरो देश छोड़ो तुम,
बन के आए हो दुश्मन वतन के लिए ।

देह त्याग के बापू अमर हो तुम,
जान दे दी थी तुमने वतन के लिए ।

कोई दलित न हो कोई भूखा न हो,
उठो जागो जवानों वतन के लिए ।

जो बीत गई वो सब बात छोड़ो,
अब आगे की सोचो वतन के लिए ।

जो सपना था बापू का पूरा करें,
स्वच्छ धरती बनाएं वतन के लिए ।

लिए अखण्ड इरादे लड़ेंगे हम,
अपनी हस्ती मिटा दें वतन के लिए ।।


✍...पदमावती 'पदम'
       आगरा ।

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