अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित होकर भारत का गौरव बढ़ाया
शिक्षा और मीडिया को हथियार बनाकर नवजवानों को लक्ष्य बताया
तुझे चांदी का मुकूट पहनाकर लोगों ने तेरे अभियान को सराहा
बदलाव के बुरे दौर से गुजर रही हमारी परिवार संस्था
परिवार समाज की सबसे बुनियादी इकाई यह दुनिया को बताया
जीवन का संघर्ष शुरू हुआ बुगल बजा बजी शहनाई
पारिवारिक एकता को घर-घर में जिन्दा करके
वसुधैव कुटुम्बकम् की पताका लहराई
आज मानव जीवन संघर्षशील है
बुगल बजाकर वोटरशिप का शंखनाद किया
विश्व शान्ति दूत बनकर भारत उभरा
उसकी जयकार हुई गली गली
मानव जीवन के उत्कर्ष को हमें घर-घर में पहुंचाना है
मझधार पड़ी जीवन की नैया अब मिलकर पार लगाना
हिम्मत न हारो ऐ वतन के रखवालो तेरी अब तो सुबह हुई
भौरों ने गीत गाया, गंुजन हुई गली-गली
अठखेलिया मचा रही तितलियां भौरों ने उन्माद भरा
जीवन की कलरव गंगा में खुशी का गीत जगमगा उठा
आओ हम सब मिलकर पारिवारिक एकता का गीत गाये
आओ, अब मिलकर वसुधैव कुटुम्बकम् जिन्दाबाद का नारा लगाये
भारतीय संस्कृति के आदर्श वसुधैव कुटुम्बकम् का परचम लहराये
आओ मिलकर, जय भारत, जय जगत का दीप घर-घर जलायें!
रचनाकार - सूरज जौनपुरी
सूर्य पाल सिंह, लखनऊ मोबाइल 94530 53903
पाल वल्र्ड टाइम्स वेबसाइट के सौजन्य से











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