‘वो तो शिक्षा ही नहीं, जो वर्तमान युग के प्रश्नों के उत्तर न दे सके!

‘वो तो शिक्षा ही नहीं, जो वर्तमान युग के प्रश्नों के उत्तर न दे सके!
‘वसुधैव कुटुम्बकम् - जय जगत’ की शिक्षा इस युग की
सबसे बड़ी आवश्यकता है! 
आदरणीय बन्धु, जय जगत!
    मनुष्य द्वारा की जाने वाली सभी सम्भव सेवाओं में सबसे श्रेष्ठ सेवा है - बच्चों की शिक्षा, उनका चरित्र निर्माण तथा उनमें ईश्वरीय ज्ञान उत्पन्न करना। नोबल पुरस्कार से सम्मानित नेल्शन मण्डेला ने कहा था कि बच्चों की शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसके उपयोग से दुनिया को बदला जा सकता है। 
    ‘वसुधैव कुटुम्बकम् - जय जगत’ एक ऐसी वैश्विक विचारधारा है, जिसमंे सम्पूर्ण विश्व की एकता, शान्ति व समृद्धि का उद्देश्य समाहित है। वास्तव में, यही वो विचार है जिसकी दुनिया को आज सबसे अधिक आवश्यकता है क्योंकि इसी विचारधारा में विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान निहित है। विश्व में बढ़ती अशान्ति व तनाव की परिस्थितियों के संदर्भ में मेरा सभी वल्र्ड लीडर्स तथा विश्ववासियों से अपील है कि वे आगे आकर पारिवारिक एकता, जय जगत, विश्व एकता, विश्व शान्ति एवं ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सार्वभौमिक विचारों द्वारा वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था (विश्व संसद) का गठन समय रहते शीघ्र करें। 
    हमारा लम्बे 41 वर्षों के शैक्षिक क्षेत्र मंे सेवा के दौरान ‘वसुधैव कुटुम्बकम् - जय जगत’ की शिक्षा पर पूरा विश्वास विकसित हुआ है। हम बच्चों की शिक्षा के द्वारा बाल एवं युवा पीढ़ी को इस राह पर चलकर देश के अच्छे नागरिक बनने के साथ विश्व नागरिक बनने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं।  
     विश्व की वर्तमान विषम परिस्थितियों को देखते हुए विश्व संसद, विश्व सरकार एवं प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय कानून व्यवस्था का गठन अब अनिवार्य आवश्यकता है और इसी के बाद धरती पर आध्यात्मिक साम्राज्य की स्थापना का अन्तिम लक्ष्य पूर्ण होगा। यहीं होगा धरती पर स्वर्ग का अवतरण। अभी नहीं तो फिर कभी नहीं? 
    हार्दिक शुभकामनाओं सहित,
भवदीय
प्रदीपजी पाल, वरिष्ठ परिजन
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